अनसुनी आवाज़

 अनसुनी आवाज़

रात के ठीक 12 बजे थे।

दिल्ली से दूर, हरियाणा के छोटे से गाँव “रामपुर खेड़ा” में चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था। ठंडी हवा सूखे पेड़ों से टकराकर अजीब सी आवाज़ें निकाल रही थी। गाँव के लोग जल्दी सो जाते थे, लेकिन उस रात 19 साल का आरव अपने कमरे में जाग रहा था।

आरव को कहानियाँ लिखने का शौक था। वह अपने मोबाइल में हॉरर और सस्पेंस स्टोरी रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर डालता था। उसके वीडियो धीरे-धीरे वायरल होने लगे थे।

उस रात भी वह नई कहानी ढूँढ रहा था।

तभी उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया।

स्क्रीन पर सिर्फ लिखा था —

“Unknown Caller”

आरव ने पहले कॉल काट दी।

लेकिन कुछ सेकंड बाद फिर वही कॉल आया।

इस बार उसने रिसीव कर लिया।

“हेलो… कौन?” आरव बोला।

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक खामोशी रही।

फिर बहुत धीमी, टूटी हुई आवाज़ आई—

“मुझे… बचा लो…”

आरव चौंक गया।

“कौन बोल रहा है?”

आवाज़ फिर आई—

“वो… मुझे मार देंगे…”

और अचानक कॉल कट गया।

आरव कुछ देर मोबाइल को देखता रहा। उसका दिल तेज़ धड़कने लगा। उसने नंबर पर वापस कॉल किया, लेकिन नंबर बंद बता रहा था।

उसे लगा शायद कोई मज़ाक कर रहा है।

लेकिन तभी उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया—

“पुरानी हवेली के पीछे वाले कुएँ तक आओ… अभी…”

मैसेज पढ़ते ही उसके हाथ ठंडे पड़ गए।

गाँव के बाहर एक पुरानी हवेली थी, जिसके बारे में कहा जाता था कि वहाँ सालों पहले एक लड़की गायब हुई थी। उसके बाद से वहाँ कोई नहीं जाता था।

आरव ने खुद को समझाया—

“ये जरूर किसी दोस्त की शरारत होगी।”

लेकिन उसके अंदर का कहानीकार जाग चुका था। उसे लगा अगर यह सब रिकॉर्ड कर लिया तो वीडियो वायरल हो जाएगा।

उसने कैमरा, टॉर्च और बाइक उठाई और रात में हवेली की तरफ निकल पड़ा।

गाँव की सड़कें खाली थीं। दूर कहीं कुत्ते भौंक रहे थे।

करीब 20 मिनट बाद वह हवेली के सामने था।

हवेली टूटी हुई थी। दीवारों पर काई जमी हुई थी। खिड़कियाँ हवा में चर्र-चर्र कर रही थीं।

आरव ने कैमरा ऑन किया।

“दोस्तों, आज मैं उस हवेली में आया हूँ जहाँ से मुझे एक रहस्यमयी कॉल आया था…”

उसकी आवाज़ में हल्का डर साफ झलक रहा था।

वह धीरे-धीरे अंदर गया।

अचानक…

ऊपर की मंजिल से किसी के दौड़ने की आवाज़ आई।

धप… धप… धप…

आरव रुक गया।

“कौन है वहाँ?” उसने जोर से पूछा।

कोई जवाब नहीं आया।

उसने टॉर्च ऊपर घुमाई, लेकिन वहाँ सिर्फ अंधेरा था।

तभी उसके मोबाइल में फिर वही नंबर फ्लैश हुआ।

उसने काँपते हाथों से कॉल उठाया।

इस बार आवाज़ और साफ थी—

“तुम देर से आए…”

आरव की साँस अटक गई।

“तुम हो कौन?”

“मैं… नेहा…”

“नेहा कौन?”

कुछ सेकंड खामोशी रही। फिर आवाज़ आई—

“जिसे इस हवेली ने निगल लिया…”

कॉल कट गया।

आरव के पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।

उसे अचानक गाँव वालों की बात याद आई।

करीब 15 साल पहले नेहा नाम की लड़की अचानक गायब हो गई थी। पुलिस को कभी उसकी लाश नहीं मिली।

लोग कहते थे कि हवेली में उसकी आत्मा भटकती है।

आरव खुद को समझा ही रहा था कि अचानक ऊपर से किसी लड़की के रोने की आवाज़ आने लगी।

धीमी… दर्द भरी…

“मुझे जाने दो…”

आरव डरते हुए सीढ़ियाँ चढ़ने लगा।

ऊपर पहुँचते ही उसे एक पुराना कमरा दिखा। दरवाज़ा आधा खुला था।

कमरे के अंदर धूल जमी थी। दीवारों पर अजीब निशान बने थे।

और कमरे के बीचोंबीच एक पुरानी कुर्सी पड़ी थी… जिस पर रस्सियाँ बंधी हुई थीं।

आरव का दिल बैठ गया।

उसे लगने लगा कि यहाँ सच में कुछ भयानक हुआ था।

तभी अचानक पीछे से किसी ने फुसफुसाया—

“तुम यहाँ क्यों आए हो?”

आरव पलटा…

लेकिन वहाँ कोई नहीं था।

उसकी टॉर्च अचानक बंद हो गई।

चारों तरफ घना अंधेरा छा गया।

आरव ने जल्दी से मोबाइल की फ्लैशलाइट ऑन की।

और तभी…

उसने कमरे के कोने में एक लड़की को खड़ा देखा।

सफेद कपड़े… लंबे बाल… झुका हुआ चेहरा…

आरव के हाथ से मोबाइल लगभग गिर गया।

“क… कौन हो तुम?”

लड़की धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी।

उसके पैरों की आवाज़ तक नहीं आ रही थी।

आरव पीछे हटने लगा।

तभी लड़की ने अपना चेहरा ऊपर उठाया।

उसकी आँखों से खून बह रहा था।

आरव जोर से चीखा और भागने लगा।

वह सीढ़ियों से नीचे उतरा और हवेली के बाहर निकल आया।

लेकिन बाहर आकर उसकी साँस रुक गई।

उसकी बाइक गायब थी।

पूरा इलाका घने कोहरे से भर चुका था।

तभी पीछे से फिर वही आवाज़ आई—

“तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकते…”

आरव ने डरते हुए पीछे देखा।

नेहा हवेली के दरवाज़े पर खड़ी थी।

लेकिन इस बार उसके चेहरे पर दर्द था… गुस्सा नहीं।

“उन्होंने मुझे मार दिया…” वह बोली।

आरव काँपते हुए बोला—

“किसने?”

नेहा ने हवेली के पीछे इशारा किया।

“कुएँ में… सच छुपा है…”

इतना कहकर वह गायब हो गई।

आरव कुछ पल वहीं खड़ा रहा।

फिर डरते हुए हवेली के पीछे गया।

वहाँ एक पुराना कुआँ था।

कुएँ के पास मिट्टी थोड़ी खुदी हुई लग रही थी।

आरव ने टॉर्च नीचे डाली।

और जो उसने देखा…

उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

कुएँ के अंदर इंसानी हड्डियाँ थीं।

आरव तुरंत पीछे हट गया।

तभी उसके मोबाइल में नेटवर्क वापस आया।

उसने तुरंत पुलिस को कॉल किया।

करीब आधे घंटे बाद पुलिस वहाँ पहुँची।

जब कुएँ की खुदाई हुई, तो अंदर से एक लड़की का कंकाल मिला।

साथ ही एक पुरानी डायरी भी मिली।

डायरी पढ़कर सबके होश उड़ गए।

उसमें लिखा था—

“मेरा नाम नेहा है।

मुझे हवेली के मालिक ने बंद कर रखा है।

अगर किसी को यह डायरी मिले… तो मेरे माँ-पापा को बता देना… मैं भाग नहीं पाई…”

पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड निकाले।

पता चला कि हवेली का मालिक वर्षों पहले अचानक गाँव छोड़कर भाग गया था।

मामला दोबारा खुला।

कुछ दिनों बाद पुलिस ने उस बूढ़े आदमी को दूसरे शहर से गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

उसने बताया कि नेहा ने उसकी सच्चाई जान ली थी, इसलिए उसने उसे मारकर कुएँ में फेंक दिया।

पूरा गाँव दहल गया।

नेहा के माता-पिता सालों बाद अपनी बेटी की सच्चाई जान पाए।

उस रात के बाद हवेली हमेशा के लिए बंद कर दी गई।

लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं हुई…

तीन दिन बाद आरव अपने कमरे में वीडियो एडिट कर रहा था।

उसने हवेली वाली रिकॉर्डिंग खोली।

वीडियो में सब कुछ था—

हवेली… आवाज़ें… पुराना कमरा…

लेकिन जब उसने उस लड़की वाला हिस्सा देखा…

उसके हाथ काँपने लगे।

वीडियो में वहाँ कोई लड़की नहीं थी।

आरव अकेला खड़ा था… और खुद से बातें कर रहा था।

उसका चेहरा डर से सफेद पड़ गया।

“ये… कैसे हो सकता है?”

तभी वीडियो के आखिर में अचानक स्क्रीन ग्लिच हुई।

और कुछ सेकंड के लिए एक चेहरा दिखाई दिया—

नेहा का।

वह मुस्कुरा रही थी।

फिर स्क्रीन पर एक लाइन उभरी—

“अब मुझे शांति मिल गई…”

और वीडियो अपने आप डिलीट हो गया।

उस रात के बाद आरव ने कभी हॉरर वीडियो नहीं बनाए।

लेकिन आज भी…

जब कभी रात के 12 बजे उसके मोबाइल पर “Unknown Caller” फ्लैश होता है…

तो वह काँप उठता है।

क्योंकि हर बार कॉल उठाने पर दूसरी तरफ सिर्फ एक धीमी आवाज़ सुनाई देती है—

“धन्यवाद…”

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