बंद सुरंग का रहस्य

 बंद सुरंग का रहस्य

साल 1998…

देवगढ़ गांव के पास एक पुरानी सुरंग थी, जिसे लोग “मौत की सुरंग” कहते थे। कहा जाता था कि जो भी रात में उस सुरंग के 


करण चीख पड़ा और भागने लगा।

लेकिन सुरंग खत्म ही नहीं हो रही थी।

वह जितना भागता… रास्ता उतना लंबा होता जाता।

पीछे से सैकड़ों कदमों की आवाज आने लगी।

“ठक… ठक… ठक…”

करण रोने लगा।

“मुझे जाने दो!”

तभी उसे सामने एक दरवाजा दिखाई दिया।

वह तेजी से उसकी तरफ भागा और दरवाजा खोल दिया।

अंदर एक छोटा कमरा था।

कमरे में पुरानी तस्वीरें रखी थीं।

एक तस्वीर देखकर करण के होश उड़ गए।

उस तस्वीर में वही लड़की थी।

और उसके साथ खड़े थे गांव के कुछ लोग।

तस्वीर के पीछे लिखा था—

“1975 — सुरंग हादसे के मृत लोग।”

करण कांपने लगा।

तभी पीछे से आवाज आई—

“हम मरे नहीं थे…”

करण धीरे-धीरे पीछे मुड़ा।

कमरे में अब दर्जनों लोग खड़े थे।

उनके चेहरे सड़े हुए थे… आंखें काली थीं… और शरीर से मिट्टी गिर रही थी।

वही लड़की आगे आई।

“उन्होंने हमें जिंदा बंद कर दिया था…”

करण समझ गया।

सालों पहले सुरंग धंस गई थी और गांव वालों ने डर के कारण अंदर फंसे लोगों को बचाने की कोशिश नहीं की।

वे लोग वहीं मर गए थे।

और अब उनकी आत्माएं बदला चाहती थीं।

अचानक सारे लोग करण की तरफ बढ़ने लगे।

करण जोर से दरवाजा खोलकर भागा।

पीछे से चीखें गूंज रही थीं।

वह पूरी ताकत से भागता रहा।

आखिरकार उसे सुरंग का बाहर वाला हिस्सा दिखाई दिया।

जैसे ही वह बाहर निकला, वह जमीन पर गिर पड़ा।

सुबह गांव वालों ने उसे सुरंग के बाहर बेहोश पाया।

लेकिन करण पूरी तरह बदल चुका था।

वह किसी से बात नहीं करता था।

बस चुपचाप बैठा रहता।

एक दिन रामलाल उससे मिलने आया।

“क्या देखा था वहां?”

करण धीरे-धीरे मुस्कुराया।

उसकी मुस्कान देखकर रामलाल डर गया।

क्योंकि करण की आंखें पूरी तरह काली हो चुकी थीं।


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