सफेद नकाब वाला आदमी
दिल्ली की एक पुरानी कॉलोनी में लगातार अजीब घटनाएँ हो रही थीं।
हर घटना से पहले लोगों को सिर्फ एक चीज़ दिखाई देती थी—
एक आदमी…
सफेद नकाब पहने हुए।
वह कभी बोलता नहीं था।
बस दूर खड़ा होकर लोगों को देखता रहता था।
और सबसे डरावनी बात—
जिसने भी उसे देखा… वह कुछ दिनों बाद गायब हो गया।
पुलिस ने कई बार जाँच की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
धीरे-धीरे पूरी कॉलोनी खाली होने लगी।
लेकिन 18 साल का युवान इन बातों पर विश्वास नहीं करता था। वह अपने दोस्तों के साथ हॉरर शॉर्ट फिल्में बनाता था और उसे लगा कि यह सिर्फ अफवाह है।
एक शाम वह अपने दोस्त हर्ष और दीपा के साथ उसी कॉलोनी में शूट करने पहुँचा।
सूरज डूब चुका था। गलियों में अजीब सन्नाटा था। ज्यादातर घर बंद पड़े थे।
“यार, यहाँ तो सच में कोई नहीं रहता,” दीपा ने धीरे से कहा।
हर्ष ने मज़ाक किया—
“अगर नकाब वाला मिल गया तो इंटरव्यू ले लेंगे।”
तीनों हँस पड़े।
तभी युवान अचानक रुक गया।
गली के आखिरी छोर पर कोई खड़ा था।
सफेद नकाब…
काला कोट…
और बिल्कुल स्थिर।
दीपा की साँस अटक गई।
“वो… वही है क्या?”
युवान ने कैमरा ज़ूम किया।
नकाब पर कोई आँखें नहीं थीं।
फिर भी ऐसा लग रहा था जैसे वह सीधे उन्हें देख रहा हो।
हर्ष चिल्लाया—
“ओए! कौन हो तुम?”
कोई जवाब नहीं।
अचानक स्ट्रीट लाइट झपकने लगी।
टिक…
टिक…
टिक…
और जब लाइट स्थिर हुई—
वह आदमी गायब था।
“ये यहाँ से गया कहाँ?” दीपा काँपते हुए बोली।
तभी पीछे से किसी के फुसफुसाने की आवाज़ आई—
“तुमने मुझे देख लिया…”
तीनों तुरंत पलटे।
लेकिन पीछे कोई नहीं था।
हर्ष ने डर छुपाते हुए कहा—
“बस बहुत हुआ। शूट खत्म।”
वे लोग जल्दी-जल्दी कॉलोनी से बाहर निकल गए।
उस रात युवान ने रिकॉर्डिंग एडिट करनी शुरू की।
वीडियो सामान्य था।
लेकिन आखिरी क्लिप देखते ही उसका खून जम गया।
वीडियो में जब वे नकाब वाले आदमी को रिकॉर्ड कर रहे थे…
उस समय उनके पीछे भी वही आदमी खड़ा था।
फिर अगले फ्रेम में…
वह उनके बिल्कुल पास आ चुका था।
युवान ने तुरंत वीडियो बंद कर दिया।
तभी उसके फोन पर अनजान नंबर से मैसेज आया—
“तुमने रिकॉर्ड क्यों किया?”
युवान घबरा गया।
उसने नंबर कॉल किया।
लेकिन दूसरी तरफ सिर्फ भारी साँसों की आवाज़ थी।
फिर कॉल कट गई।
अगले दिन हर्ष गायब हो गया।
उसका फोन उसके कमरे में मिला… और दीवार पर खरोंच से लिखा था—
“उसने मुझे देख लिया।”
अब दीपा पूरी तरह डर चुकी थी।
“हमें पुलिस के पास जाना चाहिए,” उसने कहा।
लेकिन युवान सच जानना चाहता था।
दोनों रात में फिर उसी कॉलोनी पहुँचे।
इस बार पूरी कॉलोनी और भी ज्यादा शांत थी।
हवा तक नहीं चल रही थी।
अचानक एक घर के अंदर से टीवी की आवाज़ आई।
पुराना समाचार चैनल चल रहा था।
युवान और दीपा अंदर गए।
टीवी स्क्रीन पर अचानक तस्वीर बदली।
अब स्क्रीन पर युवान और दीपा दिखाई दे रहे थे।
लाइव।
जैसे कोई उसी समय उन्हें रिकॉर्ड कर रहा हो।
दीपा चीख पड़ी।
“ये कौन कर रहा है?!”
तभी टीवी से भारी आवाज़ आई—
“जो मुझे देखता है… वो मेरा हिस्सा बन जाता है।”
अचानक पूरे घर की लाइट बंद हो गई।
अंधेरे में ऊपर से कदमों की आवाज़ आने लगी।
ठक…
ठक…
ठक…
धीरे-धीरे कोई सीढ़ियाँ उतर रहा था।
युवान ने टॉर्च ऊपर मारी।
सीढ़ियों पर वही सफेद नकाब वाला आदमी खड़ा था।
लेकिन अब उसका नकाब थोड़ा टूटा हुआ था।
और टूटे हिस्से के अंदर…
कोई चेहरा नहीं था।
सिर्फ काला अंधेरा।
दीपा रोने लगी।
“भागो!”
दोनों बाहर की तरफ दौड़े।
लेकिन बाहर निकलते ही वे रुक गए।
पूरी गली में दर्जनों सफेद नकाब वाले लोग खड़े थे।
हर घर के सामने…
हर मोड़ पर…
बस चुपचाप उन्हें देखते हुए।
युवान काँपने लगा।
“ये… ये इंसान नहीं हैं…”
तभी सारे नकाब वाले लोग एक साथ बोलने लगे—
“अब तुमने हमें देख लिया है…”
दीपा चीखते हुए भागी।
लेकिन कुछ दूर जाकर अचानक रुक गई।
युवान ने देखा—
एक नकाब वाला आदमी उसके ठीक सामने खड़ा था।
दीपा धीरे-धीरे पीछे हटने लगी।
फिर उसने काँपती आवाज़ में कहा—
“युवान… इसका चेहरा…”
नकाब धीरे-धीरे नीचे गिरा।
और उसके अंदर…
दीपा का अपना चेहरा था।
लेकिन आँखें पूरी काली।
अचानक दीपा मुस्कुराने लगी।
वही अजीब, डरावनी मुस्कान।
फिर उसने धीरे से कहा—
“अब तुम्हारी बारी है…”
सारी स्ट्रीट लाइट एक साथ बंद हो गईं।
पूरी कॉलोनी अंधेरे में डूब गई।
और उस अंधेरे में सिर्फ एक आवाज़ गूँजी—
ठक…
ठक…
ठक…
जैसे कोई धीरे-धीरे युवान की तरफ बढ़ रहा हो।
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