चीखती हुई गुड़िया
कोलकाता की एक पुरानी गली में “मोहन टॉय शॉप” नाम की छोटी-सी दुकान थी।
दुकान बाहर से बिल्कुल साधारण दिखती थी, लेकिन उसके बारे में एक बेहद डरावनी अफवाह पूरे इलाके में फैली हुई थी।
कहते थे कि वहाँ रखी एक पुरानी गुड़िया रात में रोती थी।
और जो भी उसे घर ले जाता… उसके घर से कुछ दिनों बाद किसी की मौत की खबर आती।
लोग उस गुड़िया को “रिया” कहते थे।
कहते थे कि कई साल पहले एक छोटी बच्ची उसी गुड़िया के साथ खेलते-खेलते रहस्यमयी तरीके से मर गई थी। उसके बाद से गुड़िया की आँखें अपने-आप हिलती थीं।
कुछ लोगों ने दावा किया था कि रात में गुड़िया फुसफुसाती है।
कुछ कहते थे कि वह खुद चलती है।
लेकिन 23 साल की सिया इन बातों पर विश्वास नहीं करती थी।
सिया एक कंटेंट क्रिएटर थी। वह डरावनी जगहों और चीज़ों पर वीडियो बनाती थी। जब उसने “रिया” गुड़िया के बारे में सुना, तो वह तुरंत उस दुकान पर पहुँची।
दुकान के अंदर अजीब सन्नाटा था।
चारों तरफ पुरानी गुड़ियाँ, टूटे खिलौने और धूल जमी अलमारियाँ थीं।
काउंटर के पीछे एक बूढ़ा आदमी बैठा था।
उसकी आँखें बेहद थकी हुई थीं।
सिया मुस्कुराई।
“मुझे वो भूतिया गुड़िया देखनी है।”
बूढ़े का चेहरा उतर गया।
“तुम्हें नहीं देखना चाहिए।”
“क्यों? सच में वो चलती है क्या?”
बूढ़े ने धीरे से पीछे रखी लकड़ी की अलमारी की तरफ इशारा किया।
अलमारी के अंदर सफेद फ्रॉक पहने एक पुरानी गुड़िया बैठी थी।
उसके लंबे काले बाल थे।
और उसकी नीली आँखें अजीब तरीके से चमक रही थीं।
सिया हँस पड़ी।
“बस यही है?”
तभी बूढ़ा फुसफुसाया—
“इसे रात में कभी अकेला मत छोड़ना…”
सिया ने मज़ाक समझकर गुड़िया खरीद ली।
जब वह घर पहुँची, तब शाम हो चुकी थी।
उसने कैमरा सेट किया और वीडियो रिकॉर्ड करने लगी।
“दोस्तों, आज मेरे पास है कोलकाता की सबसे डरावनी गुड़िया…”
तभी कैमरे में हल्की आवाज़ रिकॉर्ड हुई।
“माँ…”
सिया रुक गई।
उसने पीछे देखा।
कमरे में कोई नहीं था।
उसने वीडियो दोबारा चलाया।
आवाज़ फिर आई—
“माँ…”
सिया का गला सूख गया।
लेकिन उसने खुद को समझाया—
“शायद बाहर से आवाज़ आई होगी।”
रात 11 बजे उसने गुड़िया को कमरे के कोने में रख दिया और सोने चली गई।
लेकिन ठीक 2 बजे उसकी आँख खुली।
कमरे में किसी के रोने की आवाज़ आ रही थी।
धीमी… दर्द भरी सिसकियाँ।
सिया ने लाइट जलाई।
कमरे में कोई नहीं था।
लेकिन कोने में रखी गुड़िया अब बिस्तर के थोड़ा करीब थी।
सिया के हाथ काँपने लगे।
“मैंने इसे यहाँ नहीं रखा था…”
तभी अचानक कमरे की लाइट बंद हो गई।
पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।
और उसी अंधेरे में किसी छोटी बच्ची की आवाज़ गूँजी—
“मुझे अकेला मत छोड़ो…”
सिया ने जल्दी से फोन की टॉर्च ऑन की।
रोशनी सीधे गुड़िया पर पड़ी।
और उसकी चीख निकल गई।
गुड़िया का सिर अब उसकी तरफ घूम चुका था।
उसकी नीली आँखें अब पूरी काली थीं।
तभी टॉर्च अपने-आप बंद हो गई।
कमरे में फिर अंधेरा छा गया।
अब उसे फर्श पर किसी के छोटे-छोटे कदमों की आवाज़ सुनाई देने लगी।
टक…
टक…
टक…
आवाज़ धीरे-धीरे उसके बिस्तर के पास आकर रुक गई।
सिया की साँसें तेज़ हो गईं।
फिर अचानक…
किसी ने उसका पैर पकड़ लिया।
सिया चीखती हुई पीछे हटी और टॉर्च फिर ऑन की।
लेकिन वहाँ कुछ नहीं था।
सिर्फ गुड़िया… जो अब बिस्तर पर बैठी थी।
उसकी आँखों से काला तरल बह रहा था।
और होंठों पर हल्की मुस्कान थी।
सिया डर के मारे कमरे से बाहर भागी।
उसने तुरंत अपने दोस्त आर्यन को फोन किया।
“वो गुड़िया… अपने-आप चल रही है…”
आर्यन हँस पड़ा।
“तू प्रैंक कर रही है ना?”
तभी फोन के दूसरी तरफ धीमी आवाज़ आई—
“आर्यन…”
आर्यन अचानक चुप हो गया।
“ये आवाज़ किसकी थी?”
सिया काँपती हुई बोली—
“मैं अकेली हूँ…”
तभी कमरे का दरवाज़ा अपने-आप बंद हो गया।
धड़ाम!
घर की सारी लाइटें एक साथ जलने-बुझने लगीं।
टक!
टक!
टक!
और फिर दीवार पर छोटे हाथों के निशान उभरने लगे।
काले… गीले हाथों के निशान।
सिया रोने लगी।
अचानक उसके पीछे से किसी ने फुसफुसाया—
“क्या तुम मेरी नई माँ बनोगी?”
सिया धीरे-धीरे पलटी।
और उसके होश उड़ गए।
गुड़िया अब उसके पीछे खड़ी थी।
लेकिन वह अब खिलौना नहीं लग रही थी।
उसका चेहरा इंसान जैसा हो चुका था।
आँखें पूरी काली।
मुँह असामान्य रूप से बड़ा।
और हाथों की उंगलियाँ लंबी।
वह मुस्कुरा रही थी।
सिया भागकर मुख्य दरवाज़े तक पहुँची।
लेकिन दरवाज़ा नहीं खुला।
पीछे से कदमों की आवाज़ करीब आ रही थी।
टक…
टक…
टक…
फिर अचानक पूरा घर बच्चों की हँसी से गूँज उठा।
सिया ने पीछे देखा।
और उसकी चीख निकल गई।
घर के हर कोने में वही गुड़िया खड़ी थी।
दर्जनों गुड़ियाएँ।
सबकी आँखें काली थीं।
सब उसे घूर रही थीं।
और एक साथ बोल रही थीं—
“माँ…”
सिया घुटनों के बल गिर पड़ी।
तभी उसे बूढ़े दुकानदार की बात याद आई—
“इसे रात में अकेला मत छोड़ना…”
अचानक उसे लगा जैसे कोई उसके कान के पास साँस ले रहा हो।
फिर आवाज़ आई—
“अब तुम हमेशा हमारे साथ रहोगी…”
अगली सुबह पड़ोसियों ने सिया के घर से चीखें सुनीं।
जब पुलिस दरवाज़ा तोड़कर अंदर गई… तो पूरा घर खाली था।
सिर्फ दीवारों पर छोटे काले हाथों के निशान बने थे।
और कमरे के बीचों-बीच वही पुरानी गुड़िया बैठी थी।
लेकिन अब उसके पास एक और गुड़िया रखी थी।
उस नई गुड़िया का चेहरा बिल्कुल सिया जैसा था।
और उसकी आँखें धीरे-धीरे हिल रही थीं…
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