कुएँ से आती हँसी”
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव “रामपुरा” में एक पुराना कुआँ था।
गाँव वाले उसे “मौत का कुआँ” कहते थे।
कहा जाता था कि रात के बाद जो भी उस कुएँ के पास जाता… उसे किसी लड़की की हँसी सुनाई देती।
और अगले दिन… वह इंसान गायब हो जाता।
पिछले दस सालों में सात लोग गायब हो चुके थे।
लेकिन गाँव में कोई इस बारे में खुलकर बात नहीं करता था।
अर्जुन शहर से अपने दादा के पुराने घर में आया था। वह एक यूट्यूब चैनल चलाता था जहाँ वह डरावनी जगहों की सच्चाई दिखाता था।
गाँव पहुँचते ही उसने लोगों से उस कुएँ के बारे में पूछना शुरू कर दिया।
लेकिन हर कोई डर जाता।
एक बूढ़ी औरत ने काँपती आवाज़ में कहा—
“बेटा… रात में उस तरफ़ मत जाना। वहाँ कोई इंसान नहीं रहता…”
अर्जुन हल्का-सा हँसा।
“दादी, आजकल भूत-वूत कुछ नहीं होता।”
औरत ने उसकी आँखों में देखा।
“जो लोग ये कहते थे… वो अब ज़िंदा नहीं हैं।”
उस रात अर्जुन कैमरा लेकर अकेला कुएँ की तरफ़ निकल पड़ा।
आसमान में बादल थे। चाँद बार-बार छिप रहा था।
जंगल के बीचों-बीच वह कुआँ खड़ा था।
पुराना… टूटा हुआ… और पूरी तरह काई से भरा।
जैसे ही अर्जुन पास पहुँचा… उसके कैमरे की स्क्रीन अपने-आप ऑन-ऑफ होने लगी।
“Great… battery issue,” उसने बड़बड़ाया।
तभी…
“हीहीही…”
एक लड़की की धीमी हँसी हवा में गूँजी।
अर्जुन जम गया।
उसने तुरंत पीछे मुड़कर देखा।
कोई नहीं था।
फिर वही हँसी… इस बार बिल्कुल उसके कान के पास।
“हीहीही…”
उसके हाथ काँपने लगे।
“क… कौन है?”
अचानक कुएँ के अंदर से किसी के रोने की आवाज़ आने लगी।
एक लड़की रो रही थी।
“मुझे बाहर निकालो…”
अर्जुन ने डरते हुए कुएँ में झाँका।
नीचे सिर्फ़ अँधेरा था।
लेकिन फिर…
दो सफेद आँखें धीरे-धीरे ऊपर देखने लगीं।
अर्जुन पीछे हट गया।
उसका दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि साँस लेना मुश्किल हो रहा था।
तभी उसका कैमरा अपने-आप रिकॉर्डिंग चालू कर देता है।
स्क्रीन पर जो दिख रहा था… वो उसकी आँखों से अलग था।
कैमरे में कुएँ के पास एक लड़की खड़ी थी।
सफेद कपड़े… लंबे गीले बाल… और चेहरा पूरी तरह काला।
लेकिन असली डर अभी बाकी था।
क्योंकि अर्जुन की आँखों के सामने वहाँ कोई नहीं था।
“ये क्या—”
अचानक कैमरे वाली लड़की धीरे-धीरे सिर उठाने लगी।
और स्क्रीन पर उसकी टूटी हुई मुस्कान दिखाई दी।
फिर उसने कैमरे में देखते हुए कहा—
“तू भी मुझे छोड़कर जाएगा?”
अर्जुन का गला सूख गया।
वह भागने के लिए मुड़ा…
लेकिन उसके पैर रुक गए।
किसी ने उसका टखना पकड़ रखा था।
उसने नीचे देखा—
कीचड़ से भरा एक हाथ जमीन के अंदर से बाहर निकला हुआ था।
और धीरे-धीरे… कई हाथ मिट्टी से बाहर आने लगे।
अर्जुन चीख पड़ा।
तभी कुएँ से एक लड़की आधी बाहर निकली।
उसका शरीर पानी से सड़ा हुआ था… बालों से कीड़े गिर रहे थे… और उसकी गर्दन अजीब तरीके से टेढ़ी थी।
“मुझे… अकेला मत छोड़ो…”
वह धीरे-धीरे कुएँ से बाहर आने लगी।
अर्जुन पूरी ताकत से भागा।
पीछे से लड़की की हँसी लगातार सुनाई दे रही थी।
“हीहीही…”
वह जंगल पार करके किसी तरह घर पहुँचा और दरवाज़ा बंद कर लिया।
उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं।
“ये… ये सच नहीं हो सकता…”
तभी उसे याद आया कि कैमरा अभी भी रिकॉर्डिंग कर रहा है।
काँपते हाथों से उसने वीडियो चलाया।
वीडियो में साफ दिख रहा था—
जब अर्जुन भाग रहा था… उसके पीछे वो लड़की नहीं दौड़ रही थी।
बल्कि…
वो धीरे-धीरे हवा में तैर रही थी।
और सबसे डरावनी बात—
वीडियो के आख़िर में लड़की कैमरे के बिल्कुल पास आकर फुसफुसाई—
“अब मैं तेरे घर आ गई हूँ…”
अर्जुन के हाथ से कैमरा गिर गया।
कमरे की लाइट अपने-आप बंद हो गई।
पूरा घर अंधेरे में डूब गया।
फिर…
उसी कमरे के कोने से वही हँसी सुनाई दी।
“हीहीही…”
अर्जुन ने काँपते हुए मोबाइल की टॉर्च ऑन की।
और सामने देखकर उसकी चीख निकल गई।
वो लड़की कमरे की छत पर उल्टी लटकी हुई थी।
उसकी सफेद आँखें सीधे अर्जुन को घूर रही थीं…
और उसके होंठ धीरे-धीरे खुले—
“अब… तेरी बारी है…”
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