आईने में खड़ी लड़की

 आईने में खड़ी लड़की

रात के ठीक 11 बजे थे। बाहर तेज बारिश हो रही थी। बिजली बार-बार चमक रही थी और हर चमक के साथ पूरा कमरा सफेद रोशनी से भर जाता।

17 साल की नंदिनी अपने कमरे में अकेली बैठी थी। उसके माता-पिता किसी रिश्तेदार की शादी में गए थे और सुबह तक लौटने वाले थे। पुराना दो-मंज़िला घर वैसे भी उसे हमेशा डरावना लगता था, खासकर रात में।

नंदिनी पढ़ाई करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसका ध्यान बार-बार कमरे के कोने में रखे पुराने बड़े आईने पर जा रहा था। वह आईना उसकी दादी के समय का था। लकड़ी की काली फ्रेम वाला वह आईना हमेशा थोड़ा अजीब लगता था।

दादी कहा करती थीं—

“इस आईने को रात में ज्यादा देर मत देखना।”

लेकिन जब भी नंदिनी पूछती कि क्यों, दादी चुप हो जातीं।

उस रात भी नंदिनी ने खुद को समझाया— “बस बेकार की बातें हैं।”

तभी अचानक बिजली चली गई।

पूरा घर अंधेरे में डूब गया।

नंदिनी ने मोबाइल की टॉर्च जलाई। बाहर हवा खिड़कियों को जोर-जोर से हिला रही थी। तभी उसे लगा जैसे ऊपर वाली मंज़िल से किसी के चलने की आवाज आई हो।

टक… टक… टक…

उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

“शायद बिल्ली होगी…” उसने खुद से कहा।

लेकिन तभी आवाज फिर आई।

टक… टक… टक…

जैसे कोई धीरे-धीरे सीढ़ियों से उतर रहा हो।

नंदिनी ने डरते हुए कमरे का दरवाजा बंद कर लिया। तभी उसकी नजर आईने पर पड़ी।

और उसका गला सूख गया।

आईने में उसे अपने पीछे एक लड़की खड़ी दिखाई दी।

लंबे काले बाल… सफेद कपड़े… और चेहरा बिल्कुल फीका।

नंदिनी तेजी से पीछे मुड़ी।

लेकिन कमरे में कोई नहीं था।

उसने फिर आईने की तरफ देखा।

अब वहां सिर्फ उसका खुद का प्रतिबिंब था।

“मैं शायद डर की वजह से ऐसा सोच रही हूं…” उसने गहरी सांस ली।

लेकिन तभी आईने में दिख रही उसकी परछाई मुस्कुराई।

जबकि नंदिनी बिल्कुल नहीं मुस्कुरा रही थी।

उसके हाथ से मोबाइल गिर गया।

टॉर्च बंद हो गई।

पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

कुछ सेकंड बाद उसने कांपते हाथों से मोबाइल उठाया और टॉर्च ऑन की।

अब आईने में सब सामान्य था।

लेकिन तभी आईने पर धीरे-धीरे कुछ शब्द उभरने लगे।

“मुझे बाहर निकालो…”

नंदिनी की चीख निकल गई।

वह तुरंत कमरे से बाहर भागी और नीचे हॉल में आ गई। उसका दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि उसे लग रहा था अभी बेहोश हो जाएगी।

उसने खुद को शांत करने के लिए पानी पिया।

तभी घर की पुरानी घड़ी ने 12 बजने की आवाज की।

टन… टन… टन…

हर आवाज पूरे घर में गूंज रही थी।

और तभी ऊपर से फिर कदमों की आवाज आने लगी।

टक… टक… टक…

इस बार आवाज तेज थी।

जैसे कोई दौड़ रहा हो।

नंदिनी ने कांपते हुए ऊपर देखा। सीढ़ियों के अंधेरे में उसे कुछ सफेद सा खड़ा दिखाई दिया।

उसने टॉर्च ऊपर डाली।

वहां कोई नहीं था।

लेकिन अगले ही पल उसके मोबाइल पर एक मैसेज आया।

Unknown Number: “तुमने मुझे देख लिया है।”

नंदिनी का शरीर ठंडा पड़ गया।

उसने तुरंत नंबर कॉल किया।

लेकिन दूसरी तरफ से सिर्फ अजीब फुसफुसाहट सुनाई दी—

“आईना मत देखना…”

कॉल कट गई।

अब नंदिनी पूरी तरह डर चुकी थी। उसने अपने दोस्त आरव को फोन लगाया।

“प्लीज़ जल्दी घर आ जाओ… मुझे बहुत डर लग रहा है…”

आरव पास ही रहता था। उसने कहा— “10 मिनट में पहुंचता हूं।”

नंदिनी ने राहत की सांस ली।

लेकिन तभी पूरे घर में अचानक एक तेज आवाज गूंजी।

धड़ाम!!!

ऊपर वाला कमरा खुद-ब-खुद बंद हो गया था।

और उसी समय आईने के टूटने जैसी आवाज आई।

नंदिनी डरते-डरते ऊपर गई।

कमरे का दरवाजा आधा खुला था।

अंदर अंधेरा था।

उसने धीरे से दरवाजा खोला।

और जो उसने देखा, उससे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

आईने के अंदर वही लड़की खड़ी थी।

लेकिन इस बार वह साफ दिखाई दे रही थी।

उसकी आंखें पूरी काली थीं।

चेहरे पर अजीब मुस्कान थी।

और सबसे डरावनी बात—

वह धीरे-धीरे आईने के अंदर से बाहर आने की कोशिश कर रही थी।

उसके हाथ कांच से बाहर निकल रहे थे।

नंदिनी पीछे हट गई।

तभी वह लड़की बोली—

“मुझे यहां बंद किया गया था…”

उसकी आवाज बहुत धीमी और टूटी हुई थी।

“कौन… कौन हो तुम?” नंदिनी कांपते हुए बोली।

लड़की की आंखों से काले आंसू बहने लगे।

“मैं राधा हूं…”

नंदिनी को अचानक याद आया।

दादी ने एक बार किसी राधा का जिक्र किया था।

बहुत साल पहले इस घर में एक लड़की गायब हुई थी।

लोग कहते थे कि उसने आत्महत्या कर ली।

लेकिन उसकी लाश कभी नहीं मिली।

तभी अचानक कमरे का दरवाजा जोर से बंद हो गया।

धड़ाम!!!

नंदिनी चीख पड़ी।

आईने के अंदर खड़ी लड़की अब गुस्से में दिखाई दे रही थी।

“उन्होंने मुझे मार दिया…”

कमरे का तापमान अचानक बहुत ठंडा हो गया।

आईने में अब कई हाथ दिखाई देने लगे जो अंदर से कांच पीट रहे थे।

ठक… ठक… ठक…

नंदिनी रोने लगी।

तभी अचानक कमरे की लाइट अपने आप जल उठी।

और आईने में अब सिर्फ नंदिनी दिख रही थी।

सब शांत हो गया।

उसी समय नीचे से दरवाजे की घंटी बजी।

आरव आ चुका था।

नंदिनी दौड़कर नीचे गई और उसे सारी बात बताई।

आरव पहले तो हंसा, लेकिन जब उसने ऊपर जाकर आईना देखा तो उसका चेहरा भी उतर गया।

आईने पर खून जैसे लाल निशानों से लिखा था—

“सच जानो।”

आरव बोला— “हमें इस घर के बारे में पता करना होगा।”

दोनों स्टोर रूम में गए जहां पुराने सामान रखे थे।

काफी देर खोजने के बाद उन्हें दादी की पुरानी डायरी मिली।

डायरी के आखिरी पन्नों में लिखा था—

“राधा इस घर में काम करती थी। एक रात वह अचानक गायब हो गई। गांव वालों ने कहा कि वह भाग गई, लेकिन मैंने अपने पति और उनके दोस्तों को उस रात खून से सने कपड़ों में देखा था…”

नंदिनी के हाथ कांपने लगे।

डायरी में आगे लिखा था—

“उन्होंने राधा को मारकर उसकी लाश दीवार में छिपा दी… और उसकी आत्मा को इस आईने में बांध दिया…”

अचानक ऊपर से लड़की के रोने की आवाज आने लगी।

पूरा घर कांपने लगा।

आरव बोला— “हमें पुलिस बुलानी चाहिए!”

लेकिन तभी सभी दरवाजे अपने आप बंद हो गए।

मोबाइल नेटवर्क गायब हो गया।

और आईने वाली लड़की की आवाज पूरे घर में गूंजने लगी—

“मुझे न्याय चाहिए…”

अचानक स्टोर रूम की दीवार पर दरारें पड़ने लगीं।

प्लास्टर टूटकर गिरा।

और दीवार के अंदर से एक कंकाल दिखाई दिया।

नंदिनी डर के मारे पीछे हट गई।

उसी समय आईना ऊपर कमरे में जोर-जोर से हिलने लगा।

राधा की चीखें पूरे घर में गूंज रही थीं।

तभी अचानक घर की सारी लाइट बंद हो गई।

कुछ सेकंड तक पूरा अंधेरा रहा।

फिर धीरे-धीरे ऊपर कमरे से हल्की सफेद रोशनी आने लगी।

नंदिनी और आरव डरते हुए ऊपर गए।

कमरे में पहुंचते ही दोनों जम गए।

आईना अब पूरी तरह काला हो चुका था।

और उसमें सिर्फ एक चीज दिखाई दे रही थी—

राधा मुस्कुरा रही थी।

लेकिन इस बार उसकी मुस्कान डरावनी नहीं थी।

जैसे उसे आखिरकार शांति मिल गई हो।

फिर अचानक आईने में दरार पड़ी।

चटाक!!!

और पूरा आईना टूटकर जमीन पर बिखर गया।

उसी पल घर में फैली ठंडक खत्म हो गई।

बारिश रुक गई।

सब शांत हो गया।

अगले दिन पुलिस आई। दीवार से मिले कंकाल की जांच हुई। कई साल पुराना सच सामने आ गया। गांव के कुछ बुजुर्गों ने भी माना कि राधा अचानक गायब हुई थी और मामला दबा दिया गया था।

उस दिन के बाद नंदिनी ने वह घर छोड़ दिया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

कुछ महीनों बाद वह अपने नए घर में अकेली बैठी थी।

रात के 12 बजे थे।

वह हाथ धोने के लिए बाथरूम गई।

जैसे ही उसने आईने में देखा—

उसका खून जम गया।

आईने में उसके पीछे वही लड़की खड़ी थी।

राधा।

लेकिन इस बार उसने धीरे से मुस्कुराकर सिर्फ एक बात कही—

“अब भी बहुत लोग बाकी हैं…”

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