पुरानी फोटो का राज़

 पुरानी फोटो का राज़”

जयपुर के एक पुराने बाजार में एक छोटी-सी एंटीक दुकान थी —

“मेहरा एंटिक्स।”

उस दुकान में पुराने कैमरे, घड़ियाँ, रेडियो और सैकड़ों धूल भरी तस्वीरें रखी थीं।

लोग कहते थे कि दुकान का मालिक हर फोटो बेचता नहीं था।

कुछ तस्वीरें ऐसी थीं…

जिन्हें छूना भी मना था।

लेकिन एक लड़के ने गलती से ऐसी ही एक फोटो खरीद ली।

और उसके बाद…

उसकी हर रात किसी और की यादों में बदलने लगी।

1

विवान फोटोग्राफी का शौकीन था।

वह पुरानी चीज़ों का कलेक्शन करता था।

एक दिन घूमते-घूमते उसकी नज़र मेहरा एंटिक्स पर पड़ी।

दुकान अंदर से बेहद अजीब थी।

हर तरफ़ पुराने फ्रेम टंगे थे।

कुछ तस्वीरों में लोगों के चेहरे खरोंच दिए गए थे।

कुछ तस्वीरें आधी जली हुई थीं।

काउंटर पर बैठा बूढ़ा दुकानदार धीरे-धीरे बोला—

“कुछ खास ढूँढ रहे हो बेटा?”

विवान मुस्कुराया।

“पुराना कैमरा या कोई यूनिक फोटो।”

बूढ़ा कुछ सेकंड तक उसे घूरता रहा।

फिर पीछे के कमरे में चला गया।

थोड़ी देर बाद वह एक पुरानी ब्लैक-एंड-व्हाइट फोटो लेकर लौटा।

फोटो में एक परिवार खड़ा था।

माँ… पिता… और बीच में लगभग दस साल की एक लड़की।

लेकिन सबसे अजीब बात ये थी कि लड़की का चेहरा धुंधला था।

जैसे किसी ने जानबूझकर मिटा दिया हो।

विवान को फोटो देखते ही अजीब बेचैनी महसूस हुई।

“ये कितने की है?”

बूढ़ा तुरंत गंभीर हो गया।

“इसे मत खरीदो।”

विवान हँस पड़ा।

“क्यों? इसमें भूत है क्या?”

बूढ़े की आँखें अचानक ठंडी हो गईं।

“इस फोटो में जो है… वो रात में जाग जाता है।”

2

लेकिन विवान ने उसकी बात मज़ाक समझी।

उसने फोटो खरीद ली।

घर पहुँचकर उसने फोटो अपनी टेबल पर रख दी।

रात लगभग 1 बजे उसकी नींद खुली।

कमरे में अजीब ठंड थी।

और ऐसा लग रहा था… जैसे कोई उसे घूर रहा हो।

विवान ने आँखें खोलीं।

कमरा खाली था।

तभी उसकी नज़र टेबल पर रखी फोटो पर गई।

उसका दिल रुक गया।

फोटो में खड़ी लड़की अब कैमरे की तरफ़ नहीं देख रही थी।

उसका सिर थोड़ा मुड़ा हुआ था।

सीधे विवान की तरफ़।

“नहीं… ये मेरा वहम है…”

उसने तुरंत लाइट ऑन की।

फोटो फिर सामान्य थी।

लड़की पहले की तरह खड़ी थी।

विवान ने गहरी साँस ली।

“सिर्फ़ नींद का असर…”

लेकिन उसी समय…

उसके कमरे का दरवाज़ा धीरे-धीरे अपने-आप बंद होने लगा।

चररर…

3

अगले दिन विवान ने फोटो को अलमारी में बंद कर दिया।

लेकिन अजीब घटनाएँ बढ़ने लगीं।

रात में उसे किसी बच्ची के चलने की आवाज़ सुनाई देती।

कभी-कभी दीवारों पर छोटे हाथों के गीले निशान दिखाई देते।

और सबसे डरावनी बात—

हर सुबह फोटो में कुछ बदल जाता।

एक दिन परिवार के पीछे खिड़की खुली दिखाई दी।

दूसरे दिन लड़की के हाथ में गुड़िया आ गई।

तीसरे दिन…

फोटो में माँ और पिता गायब थे।

सिर्फ़ लड़की खड़ी थी।

और अब उसका चेहरा थोड़ा साफ़ दिखाई देने लगा था।

काली आँखें।

बहुत लंबी मुस्कान।

4

डरकर विवान वापस एंटीक दुकान पहुँचा।

लेकिन दुकान बंद थी।

पड़ोस वाले ने बताया—

“मेहरा जी तो पाँच साल पहले मर गए।”

विवान के पैरों तले जमीन खिसक गई।

“क्या…?”

“हाँ, उनकी दुकान तब से बंद पड़ी है।”

विवान ने पीछे मुड़कर देखा।

जहाँ कल दुकान थी… वहाँ जंग लगा ताला लटका था।

जैसे सालों से किसी ने खोला ही न हो।

उसके हाथ काँपने लगे।

“तो फिर… कल मुझसे बात किसने की थी?”

अचानक उसकी जेब में रखा फोन वाइब्रेट हुआ।

एक नई फोटो आई थी।

लेकिन उसने कोई फोटो नहीं खींची थी।

काँपते हाथों से उसने स्क्रीन खोली।

वह उसी के कमरे की तस्वीर थी।

और तस्वीर के कोने में…

वही लड़की खड़ी थी।

5

उस रात विवान ने तय किया कि वह फोटो जला देगा।

उसने फोटो टेबल पर रखी और माचिस जलाई।

लेकिन जैसे ही आग फोटो के पास पहुँची—

पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

पंखे बंद।

लाइट बंद।

फोन बंद।

सिर्फ़ फोटो दिखाई दे रही थी।

और उसमें खड़ी लड़की… अब मुस्कुरा रही थी।

धीरे-धीरे फोटो से रोने की आवाज़ आने लगी।

“मुझे मत जलाओ…”

विवान पीछे हट गया।

उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

फिर अचानक…

फोटो के अंदर की लड़की ने पलक झपकाई।

विवान चीख पड़ा।

अगले ही पल फोटो से एक काला हाथ बाहर निकला।

लंबी उंगलियाँ… सड़े हुए नाखून…

और उसने विवान की कलाई पकड़ ली।

उसकी त्वचा बर्फ जैसी ठंडी थी।

विवान ने पूरी ताकत से हाथ छुड़ाया और फोटो जमीन पर फेंक दी।

लेकिन अब देर हो चुकी थी।

कमरे के हर कोने से बच्चों की हँसी गूँजने लगी।

“हीहीही…”

6

विवान भागकर कमरे से बाहर निकला।

लेकिन पूरा घर बदल चुका था।

दीवारें पुरानी और गंदी हो गई थीं।

लकड़ी सड़ चुकी थी।

जैसे वह किसी और समय में आ गया हो।

तभी पीछे से एक बच्ची की आवाज़ आई—

“क्या तुम मेरे नए परिवार बनोगे?”

विवान धीरे-धीरे मुड़ा।

वही लड़की उसके पीछे खड़ी थी।

अब उसका चेहरा पूरी तरह साफ़ था।

आँखें पूरी काली।

मुँह कानों तक फटा हुआ।

और हाथ में पुरानी गुड़िया।

वह धीरे-धीरे बोली—

“मम्मी-पापा मुझे छोड़कर चले गए…

लेकिन तुम नहीं जाओगे…”

विवान भागने लगा।

लेकिन घर का हर दरवाज़ा वापस उसी कमरे में खुल रहा था।

जहाँ फोटो रखी थी।

और हर बार फोटो में एक चीज़ बढ़ रही थी।

पहले सिर्फ़ लड़की थी।

अब फोटो में विवान भी दिखाई देने लगा था।

पीछे खड़ा हुआ।

डरा हुआ।

7

अचानक उसके फोन पर इंटरनेट अपने-आप ऑन हो गया।

एक पुराना न्यूज आर्टिकल खुला—

“1987 में शर्मा परिवार रहस्यमयी आग में मरा।”

नीचे वही फोटो थी।

रिपोर्ट में लिखा था—

“आग लगने के बाद परिवार की बेटी नंदिनी की लाश कभी नहीं मिली।”

विवान का गला सूख गया।

“नंदिनी…”

तभी पीछे से लड़की फुसफुसाई—

“उन्होंने मुझे कमरे में बंद कर दिया था…”

विवान धीरे-धीरे पीछे हटा।

नंदिनी की आँखों से अब काला तरल बह रहा था।

“मैं बहुत देर तक जलती रही…”

कमरे में अचानक जलने की बदबू फैल गई।

दीवारों पर आग के निशान उभर आए।

और विवान को महसूस हुआ…

जैसे उसकी त्वचा गर्म हो रही हो।

8

नंदिनी धीरे-धीरे उसकी तरफ़ बढ़ी।

हर कदम के साथ फर्श पर जले हुए पैरों के निशान बन रहे थे।

“अब तुम भी यहीं रहोगे…”

विवान ने डरते हुए पास पड़ा आईना उठाकर उसकी तरफ़ फेंका।

आईना टूट गया।

और उसी पल नंदिनी जोर से चीखी।

पूरा घर काँप उठा।

विवान समझ गया—

उसे अपना चेहरा पसंद नहीं।

उसने जल्दी से कमरे के सारे आईने उसके सामने कर दिए।

नंदिनी चीखने लगी।

उसका चेहरा पिघलने लगा।

कमरा जोर-जोर से हिलने लगा।

विवान ने मौका देखकर फोटो उठाई और आग में फेंक दी।

इस बार फोटो सचमुच जलने लगी।

नंदिनी दर्द से चिल्लाई—

“नहींईईई…!”

पूरा घर आग की लपटों में घिर गया।

और अगले ही सेकंड…

सब कुछ गायब हो गया।

9

सुबह विवान सड़क पर पड़ा मिला।

उसके हाथ बुरी तरह जले हुए थे।

लेकिन आसपास कोई घर नहीं था।

सिर्फ़ एक खाली मैदान।

पुलिस ने उसकी बात पर विश्वास नहीं किया।

उन्होंने कहा—

“तुम्हें भ्रम हुआ होगा।”

लेकिन असली डर अभी बाकी था।

कुछ दिनों बाद विवान ने अपने कैमरे की पुरानी तस्वीरें देखीं।

आख़िरी फोटो देखकर उसका खून जम गया।

वह अस्पताल के बेड पर सो रहा था।

और उसके पीछे…

एक छोटी लड़की खड़ी मुस्कुरा रही थी।

हाथ में वही जली हुई गुड़िया।

फोटो के नीचे अपने-आप शब्द उभरने लगे—

“परिवार अभी पूरा नहीं हुआ…”

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