पुरानी घड़ी का रहस्य
कोलकाता की तंग गलियों के बीच एक पुरानी एंटीक दुकान थी—“वक्त महल”। दुकान इतनी पुरानी थी कि लोग कहते थे, वहाँ रखी हर चीज़ अपने अंदर कोई राज छुपाए बैठी है।
17 साल का इशान पुराने सामान इकट्ठा करने का शौकीन था। एक दिन वह उसी दुकान में पहुँचा।
दुकान के अंदर अजीब सन्नाटा था। दीवारों पर सैकड़ों पुरानी घड़ियाँ टंगी थीं, और हर घड़ी अलग समय दिखा रही थी।
टिक… टिक… टिक…
उनकी आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।
तभी एक बूढ़ा दुकानदार सामने आया।
“क्या ढूँढ रहे हो?” उसने धीमी आवाज़ में पूछा।
इशान की नजर एक काली जेब घड़ी पर पड़ी। बाकी घड़ियों के बीच वह अलग चमक रही थी।
“ये कितने की है?”
बूढ़े का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।
“ये घड़ी मत लो।”
“क्यों?”
बूढ़ा कुछ पल चुप रहा, फिर बोला—
“ये वक्त नहीं दिखाती… वक्त बदल देती है।”
इशान हँस पड़ा।
“फिल्मी डायलॉग अच्छे बोल लेते हो।”
उसने पैसे दिए और घड़ी खरीद ली।
घर पहुँचते ही उसने घड़ी खोली।
अंदर एक अजीब निशान बना था।
और नीचे छोटे अक्षरों में लिखा था—
“हर बार समय बदलोगे… कुछ खो दोगे…”
इशान ने ध्यान नहीं दिया।
रात को 12 बजे अचानक घड़ी अपने-आप चलने लगी।
टिक… टिक… टिक…
फिर उसकी सुइयाँ उल्टी दिशा में घूमने लगीं।
अचानक कमरे की लाइट बंद हो गई।
जब लाइट वापस आई…
इशान अपने कमरे में नहीं था।
वह स्कूल की पुरानी लाइब्रेरी में खड़ा था।
लेकिन ये वही लाइब्रेरी नहीं थी।
सब कुछ पुराना लग रहा था। लकड़ी की मेजें नई थीं। दीवारों पर पुराने पोस्टर लगे थे।
तभी उसने पीछे से आवाज़ सुनी—
“तुम यहाँ कैसे आए?”
इशान ने मुड़कर देखा…
उसके सामने उसके स्कूल के पुराने प्रिंसिपल खड़े थे।
लेकिन वो तो 20 साल पहले मर चुके थे।
इशान डर गया।
तभी उसकी नजर दीवार पर लगी तारीख पर गई—
12 जुलाई 2006
इशान के हाथ काँपने लगे।
“मैं… अतीत में हूँ?”
अचानक जेब में रखी घड़ी फिर तेज़ चलने लगी।
और अगले ही पल वह वापस अपने कमरे में था।
उसकी साँसें तेज चल रही थीं।
अगली सुबह उसने इंटरनेट पर खोजा।
उसे पता चला कि 12 जुलाई 2006 को स्कूल की लाइब्रेरी में आग लगी थी… जिसमें एक छात्र की मौत हो गई थी।
उस छात्र का नाम था—आर्यन।
उस रात इशान फिर घड़ी को देखने लगा।
उसके मन में सवाल था—
अगर ये सच में समय बदल सकती है… तो क्या वह अतीत बदल सकता है?
रात 12 बजे उसने फिर घड़ी खोली।
इस बार उसने मन में सोचा—
“आर्यन को बचाना है।”
घड़ी की सुइयाँ घूमने लगीं।
और अगले पल…
वह फिर 2006 में था।
लाइब्रेरी में धुआँ भरना शुरू हो चुका था। बच्चे बाहर भाग रहे थे।
तभी इशान ने एक छोटे लड़के को अंदर फँसा देखा।
“आर्यन!” किसी ने चिल्लाया।
इशान आग के बीच दौड़ा और लड़के का हाथ पकड़ लिया।
दोनों किसी तरह बाहर निकल आए।
आर्यन बच गया।
लेकिन उसी क्षण घड़ी की सुइयाँ रुक गईं।
और एक डरावनी आवाज़ गूँजी—
“समय बदल चुका है…”
अगले पल इशान वापस अपने कमरे में था।
वह खुश था कि उसने किसी की जान बचा ली।
लेकिन तभी उसकी नजर दीवार पर लगी परिवार की फोटो पर गई।
उस फोटो में वह खुद मौजूद नहीं था।
उसकी जगह कोई दूसरा लड़का खड़ा था।
इशान का दिल जोर से धड़कने लगा।
“ये क्या…”
वह भागकर अपनी माँ के पास गया।
लेकिन माँ ने उसे देखकर पूछा—
“तुम कौन हो?”
इशान के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उसका सबसे अच्छा दोस्त, उसका घर, उसकी पहचान…
सब बदल चुका था।
उसने फिर घड़ी निकाल ली।
“मुझे सब ठीक करना होगा।”
लेकिन घड़ी के अंदर अब नया संदेश लिखा था—
“हर बदलाव की कीमत होती है…”
अचानक कमरे का तापमान गिरने लगा।
दीवार पर लगी घड़ियाँ अपने-आप चलने लगीं।
टिक… टिक… टिक…
और तभी कमरे के कोने में एक परछाईं दिखाई दी।
वह धीरे-धीरे आगे आई।
इशान की साँस रुक गई।
वह परछाईं बिल्कुल उसी की तरह दिख रही थी।
लेकिन उसकी आँखें पूरी काली थीं।
वह मुस्कुराई।
“तुमने समय के नियम तोड़े हैं… अब तुम्हारी जगह मैं लूँगा।”
इशान पीछे हटने लगा।
“तुम कौन हो?”
परछाईं हँस पड़ी।
“मैं वो हूँ… जो हर बार पैदा होता है जब कोई अतीत बदलता है।”
अचानक घड़ी हवा में उठ गई।
उसकी सुइयाँ तेज़ घूमने लगीं।
कमरे की दीवारें बदलने लगीं।
अब वहाँ सैकड़ों परछाइयाँ खड़ी थीं।
हर परछाईं किसी ऐसे इंसान की थी जिसने कभी समय बदलने की कोशिश की थी।
और उन सबकी आँखें काली थीं।
इशान चीखा और घड़ी पकड़कर जमीन पर दे मारी।
घड़ी टूट गई।
एक तेज़ चमक हुई।
और सब कुछ शांत हो गया।
सुबह…
इशान अपनी बिस्तर पर पड़ा था।
सब कुछ सामान्य लग रहा था।
माँ रसोई में थी।
दीवार पर वही पुरानी फैमिली फोटो लगी थी।
इशान ने राहत की साँस ली।
“शायद सब सपना था…”
तभी उसकी नजर टेबल पर पड़ी।
वहाँ वही टूटी हुई घड़ी रखी थी।
और उसके काँच पर उँगली से लिखा था—
“समय कभी कर्ज़ नहीं भूलता…”
Comments
Post a Comment