मरी हुई आवाज़”
भोपाल शहर में एक नया रेडियो स्टेशन शुरू हुआ था —
“रेडियो 98.3 नाइट वेव।”
उस स्टेशन का सबसे लोकप्रिय शो था—
“मिडनाइट कॉलर”
रात 12 बजे शुरू होने वाला ये शो लोगों की डरावनी कहानियाँ लाइव सुनाता था।
हजारों लोग हर रात इसे सुनते थे।
लेकिन एक रात…
उस शो में एक ऐसी कॉल आई जिसने पूरे स्टेशन को हमेशा के लिए बंद कर दिया।
1
आरव उस शो का नया आरजे था।
उसकी आवाज़ बेहद शांत और गहरी थी, इसलिए लोग उसे पसंद करने लगे थे।
उस रात बाहर तेज़ बारिश हो रही थी।
पूरे स्टेशन में सिर्फ़ तीन लोग मौजूद थे—
आरव, साउंड इंजीनियर नेहा और सिक्योरिटी गार्ड रमेश।
घड़ी में 11:58 हो रहे थे।
आरव ने माइक्रोफोन ऑन किया।
“हेलो दोस्तों… स्वागत है आपका मिडनाइट कॉलर में। आज की रात थोड़ी डरावनी होने वाली है…”
नेहा ने काँच के पीछे से मुस्कुराते हुए थम्ब्स-अप दिया।
शो शुरू हो चुका था।
2
पहले एक घंटे तक सब सामान्य रहा।
लोग कॉल करके अपनी भूतिया कहानियाँ सुनाते रहे।
फिर अचानक…
फोन लाइन अपने-आप एक्टिव हो गई।
स्क्रीन पर नंबर की जगह सिर्फ़ ये लिखा था—
“UNKNOWN FREQUENCY”
नेहा ने चौंककर सिस्टम देखा।
“ये क्या है…?”
आरव ने कॉल रिसीव कर ली।
“हेलो… कौन बोल रहे हैं?”
कुछ सेकंड तक सिर्फ़ खराश जैसी आवाज़ आती रही।
फिर बहुत धीमी… टूटी हुई आवाज़ सुनाई दी—
“क्या… मेरी आवाज़… सुन रहे हो…?”
आरव थोड़ा असहज हो गया।
“जी… आप ऑन एयर हैं।”
उधर से धीमी हँसी सुनाई दी।
“अच्छा है… क्योंकि बाकी लोग अब मुझे नहीं सुन सकते…”
स्टूडियो में अचानक ठंड बढ़ गई।
नेहा ने अपने हाथ रगड़े।
“AC बंद है फिर भी इतनी ठंड कैसे…?”
आरव ने कॉल जारी रखी।
“आप अपना नाम बताएँगे?”
कुछ सेकंड चुप्पी रही।
फिर आवाज़ आई—
“मैं… छह महीने पहले मर चुकी हूँ…”
आरव के चेहरे का रंग उड़ गया।
नेहा ने तुरंत हेडफोन उतारे।
“प्रैंक कॉल है क्या?”
लेकिन तभी…
स्टूडियो की सारी लाइट्स एक साथ झपकने लगीं।
टिक… टिक… टिक…
आरव ने घबराकर पूछा—
“तुम… कौन हो?”
उधर से जवाब आया—
“मैं उसी कमरे में हूँ… जहाँ तुम बैठे हो…”
3
आरव ने तुरंत पीछे देखा।
कमरा खाली था।
सिर्फ़ माइक्रोफोन… कंप्यूटर और काँच के पीछे बैठी नेहा।
लेकिन तभी नेहा का चेहरा डर से जम गया।
वह काँपते हाथ से आरव के पीछे इशारा कर रही थी।
आरव धीरे-धीरे मुड़ा।
और उसकी साँस रुक गई।
स्टूडियो के कोने में एक लड़की खड़ी थी।
लंबे गीले बाल… सफेद चेहरा… और गर्दन अजीब तरीके से टेढ़ी।
उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।
आरव चीख पड़ा।
लेकिन अगले ही पल लड़की गायब हो गई।
फोन लाइन अब भी चालू थी।
और वही आवाज़ हँस रही थी।
“अब तुमने मुझे देख लिया…”
नेहा तुरंत स्टूडियो के अंदर भागी।
“हमें यहाँ से निकलना होगा!”
तभी सारे दरवाज़े अपने-आप बंद हो गए।
धड़ाम!
पूरा स्टेशन अंधेरे में डूब गया।
सिर्फ़ रेडियो कंसोल की लाल लाइट जल रही थी।
और स्पीकर से अब भी वही आवाज़ आ रही थी—
“कोई बाहर नहीं जाएगा…”
4
रमेश गार्ड दौड़ता हुआ अंदर आया।
“क्या हुआ?”
नेहा चीखी—
“यहाँ कोई है!”
रमेश ने टॉर्च ऑन की।
“कौन होगा मैडम? आप लोग डर गए हैं बस।”
तभी टॉर्च अपने-आप बंद हो गई।
अंधेरे में किसी लड़की के रोने की आवाज़ गूँजने लगी।
“मुझे… बचा लो…”
फिर अचानक…
रमेश हवा में उछल गया।
जैसे किसी ने उसका गला पकड़ लिया हो।
उसकी आँखें बाहर निकलने लगीं।
आरव और नेहा डर के मारे जड़ हो गए।
रमेश चीख भी नहीं पा रहा था।
कुछ सेकंड बाद उसका शरीर जोर से दीवार से टकराया।
धड़ाम!
और वह फर्श पर गिर पड़ा।
बिल्कुल शांत।
उसकी गर्दन पूरी तरह उल्टी घूम चुकी थी।
नेहा रोने लगी।
“ये… ये क्या है…?”
स्पीकर से लड़की की टूटी हुई हँसी सुनाई दी—
“अब अगली बारी तुम्हारी है…”
5
आरव ने किसी तरह इमरजेंसी दरवाज़ा खोलने की कोशिश की।
लेकिन दरवाज़ा हिल भी नहीं रहा था।
उसी समय कंप्यूटर स्क्रीन अपने-आप ऑन हुई।
उस पर पुरानी न्यूज क्लिप चलने लगी।
“छह महीने पहले रेडियो स्टेशन की इंटर्न सिया रहस्यमयी तरीके से गायब…”
स्क्रीन पर उसी लड़की की फोटो थी।
नेहा काँप उठी।
“ये… यही लड़की है…”
न्यूज रिपोर्ट आगे चली—
“आख़िरी बार उसे स्टेशन के बेसमेंट में देखा गया था…”
अचानक स्क्रीन ग्लिच हुई।
फिर वीडियो में सिया दिखाई दी।
वह रो रही थी।
“उन्होंने मुझे बंद कर दिया… मैं अभी भी यहीं हूँ…”
वीडियो अचानक बंद हो गया।
और तभी…
बेसमेंट की तरफ़ जाने वाला दरवाज़ा धीरे-धीरे खुल गया।
चरररर…
अंदर से बदबूदार ठंडी हवा आने लगी।
6
नेहा डर गई।
“हम नीचे नहीं जाएँगे!”
लेकिन तभी स्पीकर से आवाज़ आई—
“अगर सच नहीं देखा… तो सुबह तक मर जाओगे…”
आरव ने काँपते हुए टॉर्च उठाई।
दोनों धीरे-धीरे बेसमेंट में उतरे।
नीचे पूरा अंधेरा था।
दीवारों पर पुराने तार लटक रहे थे।
और बीच में एक लोहे का दरवाज़ा था।
उस पर खरोंच से लिखा था—
“DON’T OPEN”
नेहा पीछे हट गई।
“नहीं… नहीं…”
तभी अंदर से किसी ने दरवाज़ा पीटना शुरू किया।
धड़! धड़! धड़!
एक लड़की चीख रही थी—
“मुझे बाहर निकालो!”
आरव ने डरते हुए कुंडी खोली।
दरवाज़ा खुलते ही सड़ी हुई बदबू फैल गई।
अंदर एक छोटा कमरा था।
और फर्श पर…
एक कंकाल पड़ा था।
उसके हाथ में रेडियो स्टेशन का आईडी कार्ड था—
“SIYA”
नेहा की चीख निकल गई।
तभी पीछे से भारी आवाज़ आई—
“तुमने दरवाज़ा क्यों खोला…?”
दोनों मुड़े।
अंधेरे में वही लड़की खड़ी थी।
लेकिन अब उसका चेहरा पूरी तरह सड़ा हुआ था।
आँखों से काला खून बह रहा था।
और उसके हाथ-पैर उल्टी दिशा में मुड़े हुए थे।
7
सिया धीरे-धीरे उनकी तरफ़ बढ़ने लगी।
“उन्होंने मुझे यहीं मरने के लिए छोड़ दिया…”
हर कदम के साथ लाइट्स झपक रही थीं।
आरव काँपते हुए बोला—
“क… किसने?”
सिया की गर्दन अचानक 180 डिग्री घूम गई।
“तुम्हारे स्टेशन वालों ने…”
तभी ऊपर से किसी आदमी की आवाज़ आई—
“भागो वहाँ से!”
वो स्टेशन का मालिक था — विक्रम।
उसके हाथ में बंदूक थी।
वह चिल्लाया—
“उसकी बात मत सुनो!”
लेकिन सिया अचानक हवा में गायब हो गई।
अगले ही सेकंड…
वह विक्रम के पीछे दिखाई दी।
उसने धीरे से उसके कान में फुसफुसाया—
“अब याद आया मुझे?”
विक्रम डर से काँपने लगा।
“न… नहीं…”
तभी सिया ने उसका सिर पकड़ लिया।
और एक झटके में उसकी गर्दन तोड़ दी।
चटाक!
विक्रम की लाश सीढ़ियों से नीचे गिर गई।
8
पूरा स्टेशन अब अजीब आवाज़ों से भर चुका था।
स्पीकर अपने-आप ऑन-ऑफ हो रहे थे।
हर तरफ़ सिर्फ़ सिया की आवाज़ गूँज रही थी—
“अब कोई नहीं बचेगा…”
नेहा रोते हुए बोली—
“हमें यहाँ से निकलना होगा!”
अचानक सारे रेडियो स्पीकर्स फटने लगे।
धड़ाम! धड़ाम!
दीवारों पर खून जैसे निशान उभर आए।
और तभी…
आरव के फोन पर लाइव रेडियो स्ट्रीम खुल गई।
लेकिन उसमें जो दिख रहा था… उससे उसका खून जम गया।
लाइव वीडियो में आरव और नेहा बेसमेंट में खड़े थे।
और उनके पीछे…
सैकड़ों काली परछाइयाँ खड़ी थीं।
धीरे-धीरे मुस्कुराती हुई।
9
नेहा चीखी—
“पीछे मत देखना!”
लेकिन देर हो चुकी थी।
आरव मुड़ गया।
अंधेरे में सचमुच दर्जनों चेहरे खड़े थे।
सड़े हुए… जले हुए… टूटी आँखों वाले चेहरे।
जैसे स्टेशन में मर चुके लोग वापस आ गए हों।
सिया हँसने लगी।
“ये सब मेरी आवाज़ सुन चुके हैं…”
अचानक सारी परछाइयाँ उनकी तरफ़ दौड़ पड़ीं।
आरव और नेहा भागे।
सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर पहुँचे।
मुख्य दरवाज़ा अब खुला था।
दोनों पूरी ताकत से बाहर भागे।
बारिश अब भी हो रही थी।
दोनों सड़क पर गिर पड़े।
पीछे मुड़कर देखा—
पूरा रेडियो स्टेशन अंधेरे में डूबा था।
जैसे वहाँ कभी कोई था ही नहीं।
10
अगले दिन खबर आई—
“रेडियो 98.3 नाइट वेव हमेशा के लिए बंद।”
पुलिस को स्टेशन के अंदर कई पुरानी हड्डियाँ मिलीं।
लेकिन सिया की लाश कभी नहीं मिली।
कुछ महीनों बाद…
एक नए शहर में नया रेडियो शो शुरू हुआ—
“MIDNIGHT VOICES”
पहली रात…
रात 12 बजे…
फोन लाइन अपने-आप एक्टिव हुई।
स्क्रीन पर लिखा था—
“UNKNOWN FREQUENCY”
और फिर वही टूटी हुई आवाज़ सुनाई दी—
“क्या… मेरी आवाज़… सुन रहे हो…?”
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