अंधे गाँव का रहस्य
बिहार के जंगलों के बीच एक छोटा-सा गाँव था—“कालीबाड़ी”।
उस गाँव के बारे में एक बहुत अजीब बात मशहूर थी।
वहाँ कोई भी इंसान रात में अपनी आँखें नहीं खोलता था।
सूरज ढलते ही पूरा गाँव दरवाज़े बंद कर लेता। खिड़कियों पर काले कपड़े टाँग दिए जाते। और लोग आँखों पर पट्टी बाँधकर बैठ जाते।
कहा जाता था कि अगर किसी ने रात में आँखें खोल दीं… तो अगली सुबह उसकी आँखें हमेशा के लिए गायब हो जातीं।
लोग इस बात को अंधविश्वास मानते थे।
लेकिन पत्रकार आर्यन के लिए यह उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी स्टोरी थी।
26 साल का आर्यन रहस्यमयी घटनाओं पर रिपोर्ट बनाता था। जब उसने कालीबाड़ी के बारे में सुना, तो वह तुरंत वहाँ पहुँच गया।
शाम होने वाली थी जब उसकी जीप गाँव के बाहर रुकी।
गाँव पूरी तरह शांत था।
ना बच्चों की आवाज़…
ना जानवरों की…
बस हवा में अजीब-सी ठंडक थी।
तभी एक बूढ़ा आदमी लाठी टेकते हुए उसके पास आया।
उसकी आँखों पर काली पट्टी बँधी थी।
“तुम यहाँ क्यों आए हो?” उसने धीमी आवाज़ में पूछा।
आर्यन मुस्कुराया।
“मैं पत्रकार हूँ। आपके गाँव की सच्चाई जानने आया हूँ।”
बूढ़े के चेहरे पर डर उतर आया।
“सच्चाई जान लोगे… तो वापस नहीं जा पाओगे।”
आर्यन हँस पड़ा।
“क्या सच में यहाँ लोग रात में आँखें नहीं खोलते?”
बूढ़े ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।
उसकी पकड़ बर्फ जैसी ठंडी थी।
“सूरज डूबने से पहले गाँव छोड़ दो।”
“और अगर ना जाऊँ?”
बूढ़ा काँपते हुए बोला—
“तो रात में चाहे कुछ भी सुनो… आँखें मत खोलना…”
इतना कहकर वह चला गया।
आर्यन ने कैमरा निकाला और रिकॉर्डिंग शुरू कर दी।
“दोस्तों, मैं अभी कालीबाड़ी गाँव में हूँ जहाँ लोग दावा करते हैं कि रात में कोई अदृश्य चीज़ घूमती है…”
तभी उसे महसूस हुआ कि आसपास खड़े कई लोग उसे घूर रहे थे।
सबकी आँखों पर पट्टियाँ बँधी थीं।
सूरज धीरे-धीरे डूबने लगा।
और अचानक पूरा गाँव बदल गया।
हर घर के दरवाज़े जोर से बंद होने लगे।
धड़ाम!
धड़ाम!
धड़ाम!
लोग भागते हुए अंदर जा रहे थे।
एक औरत अपने बच्चे की आँखों पर कपड़ा बाँध रही थी।
एक बूढ़ा आदमी रोते हुए मंत्र पढ़ रहा था।
आर्यन को पहली बार थोड़ा डर महसूस हुआ।
गाँव के बीच बने पुराने मकान में उसे रात रुकने की जगह मिल गई।
मकान के मालिक, रमाकांत, ने उसे खाना देते हुए कहा—
“रात 12 बजे के बाद जो भी आवाज़ सुनो… बाहर मत देखना।”
आर्यन मुस्कुराया।
“अगर मैंने देख लिया तो?”
रमाकांत की साँसें तेज़ हो गईं।
“फिर वो तुम्हें भी देख लेगा…”
रात 11 बजे तक पूरा गाँव बिल्कुल शांत हो चुका था।
इतनी खामोशी थी कि घड़ी की टिक-टिक भी डरावनी लग रही थी।
आर्यन ने कैमरा चालू किया और बिस्तर पर बैठ गया।
वह इन सब बातों को अंधविश्वास साबित करना चाहता था।
लेकिन ठीक 12 बजे…
बाहर से किसी के चलने की आवाज़ आई।
टक…
टक…
टक…
जैसे कोई नंगे पैर मिट्टी पर चल रहा हो।
फिर अचानक पूरे गाँव में कुत्ते जोर-जोर से भौंकने लगे।
और अगले ही पल…
सब चुप।
इतनी गहरी खामोशी कि आर्यन का दिल जोर से धड़कने लगा।
तभी बाहर से फुसफुसाहट सुनाई दी—
“आँखें खोलो…”
आर्यन का गला सूख गया।
आवाज़ बिल्कुल उसके कान के पास से आई थी।
उसने धीरे से खिड़की की तरफ देखा।
खिड़की पर काला कपड़ा लगा था।
लेकिन उसके पीछे… किसी की परछाई दिखाई दे रही थी।
वह परछाई इंसान जैसी नहीं थी।
उसकी गर्दन बहुत लंबी थी।
और वह धीरे-धीरे हिल रही थी।
फिर आवाज़ आई—
“बस एक बार देख लो…”
आर्यन ने डरते हुए कैमरा खिड़की की तरफ घुमा दिया।
लेकिन कैमरे की स्क्रीन पूरी काली हो गई।
अचानक कमरे का दरवाज़ा अपने-आप चरमराने लगा।
चीईईई…
आर्यन के माथे पर पसीना आ गया।
दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला।
लेकिन बाहर कोई नहीं था।
सिर्फ अंधेरा।
फिर उसे ऊपर छत से किसी के रेंगने की आवाज़ सुनाई दी।
खर्र…
खर्र…
जैसे कोई भारी चीज़ छत पर घिसट रही हो।
आर्यन ने टॉर्च उठाई और ऊपर रोशनी डाली।
कुछ नहीं था।
लेकिन तभी…
टप…
उसके हाथ पर कुछ गिरा।
वह चौंक गया।
हाथ पर काला गाढ़ा तरल था।
खून जैसा।
और अगले ही पल छत से दो सफेद आँखें चमकीं।
आर्यन डर के मारे पीछे हट गया।
छत पर एक लंबी काली आकृति उल्टी चिपकी हुई थी।
उसके हाथ-पैर असामान्य रूप से लंबे थे।
चेहरे पर सिर्फ दो सफेद आँखें थीं।
और उसका मुँह कानों तक फटा हुआ था।
वह मुस्कुरा रही थी।
आर्यन की चीख निकल गई।
अचानक वह आकृति गायब हो गई।
कमरे की लाइट अपने-आप जलने-बुझने लगी।
टक!
टक!
टक!
फिर बाहर पूरे गाँव से चीखों की आवाज़ आने लगी।
लोग रो रहे थे।
कोई मंत्र पढ़ रहा था।
कोई दरवाज़े पीट रहा था।
आर्यन अब खुद को रोक नहीं पाया।
उसने खिड़की से काला कपड़ा हटाया।
और जैसे ही बाहर देखा…
उसकी साँस रुक गई।
पूरा गाँव सड़क पर खड़ा था।
सभी लोगों की आँखों की पट्टियाँ उतर चुकी थीं।
लेकिन उनकी आँखें नहीं थीं।
आँखों की जगह सिर्फ काला खाली गड्ढा था।
वे सब एक साथ आसमान की तरफ देख रहे थे।
आर्यन ने धीरे-धीरे ऊपर देखा।
और उसकी चीख निकल गई।
आसमान में एक विशाल काली आकृति तैर रही थी।
वह इंसान नहीं थी।
उसका शरीर धुएँ जैसा था।
हजारों सफेद आँखें उसके पूरे शरीर पर खुल-बंद हो रही थीं।
और वह नीचे गाँव को घूर रही थी।
फिर अचानक उसकी सारी आँखें एक साथ आर्यन की तरफ घूम गईं।
कमरे का तापमान अचानक जमाने जितना ठंडा हो गया।
आर्यन पीछे हटने लगा।
तभी उसके कान में आवाज़ गूँजी—
“अब तुमने हमें देख लिया…”
अचानक उसकी आँखों में तेज़ जलन होने लगी।
वह दर्द से चीख पड़ा।
उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसकी आँखें अंदर से खींच रहा हो।
वह फर्श पर गिर पड़ा।
कैमरा उसके हाथ से छूट गया।
और कैमरे की स्क्रीन में आखिरी चीज़ रिकॉर्ड हुई—
वही काली आकृति… जो धीरे-धीरे कमरे के अंदर उतर रही थी।
अगली सुबह पुलिस गाँव पहुँची।
पूरा गाँव खाली था।
एक भी इंसान नहीं मिला।
सिर्फ घरों के अंदर फर्श पर पड़ी थीं… सैकड़ों काली पट्टियाँ।
और आर्यन का कैमरा।
जब पुलिस ने रिकॉर्डिंग देखी… तो आखिरी वीडियो देखकर सबके होश उड़ गए।
वीडियो में आर्यन धीरे-धीरे कैमरे के पास आया।
उसकी आँखों की जगह अब सिर्फ काला अंधेरा था।
और वह मुस्कुराकर सिर्फ एक बात बोल रहा था—
“रात में… आँखें मत खोलना…”
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