लाल डायरी का रहस्य
“तुम चाहे जहाँ छिप जाओ… मैं तुम्हें ढूँढ लूँगी।”
ये आख़िरी लाइन पढ़ते ही निखिल के हाथ काँप गए।
उसने तुरंत लाल रंग की पुरानी डायरी बंद कर दी। कमरे में अजीब सन्नाटा था। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी और खिड़की पर पानी की बूंदें किसी की उँगलियों जैसी आवाज़ कर रही थीं।
निखिल ने गहरी साँस ली।
वो खुद पर हँसना चाहता था।
“सिर्फ एक पुरानी डायरी है… मैं इतना डर क्यों रहा हूँ?”
लेकिन दिल मानने को तैयार नहीं था।
1
निखिल एक यूट्यूबर था। उसका चैनल डरावनी और सस्पेंस कहानियों के लिए काफी मशहूर हो चुका था। लोग उसकी वीडियो देखकर कहते—
“भाई, ऐसा लगता है जैसे सब सच में हुआ हो।”
लेकिन सच्चाई ये थी कि निखिल खुद भूत-प्रेत जैसी चीज़ों पर विश्वास नहीं करता था। उसके लिए सब सिर्फ कंटेंट था।
एक दिन उसे अपने दोस्त समीर का फोन आया।
“भाई, कंटेंट चाहिए ना? मेरे गाँव में एक पुराना घर है। वहाँ से एक अजीब डायरी मिली है।”
निखिल तुरंत तैयार हो गया।
अगले दिन वो समीर के गाँव “धनौरा” पहुँच गया।
गाँव छोटा था, लेकिन लोगों की आँखों में अजीब डर दिखाई देता था। जैसे वो किसी अनकहे राज़ को छिपा रहे हों।
समीर उसे सीधे गाँव के बाहर बने एक टूटे मकान में ले गया।
“यहीं मिली थी डायरी।”
घर अंदर से पूरी तरह वीरान था। दीवारों पर दरारें थीं और हर जगह धूल जमी हुई थी।
कमरे के कोने में एक लकड़ी की अलमारी पड़ी थी। उसी के अंदर लाल कपड़े में लिपटी वो डायरी रखी थी।
निखिल ने उत्सुकता से उसे खोला।
पहले कुछ पन्नों पर एक लड़की की लिखावट थी।
“मेरा नाम राधा है।
अगर कोई ये डायरी पढ़ रहा है… तो समझ लो मैं अब इस दुनिया में नहीं हूँ।”
निखिल मुस्कुराया।
“कमाल की शुरुआत है।”
वो आगे पढ़ने लगा।
“इस घर में कुछ है।
रात को कोई मेरे कमरे के बाहर चलता है।
हर रात दरवाज़े पर तीन बार दस्तक होती है।”
ठक… ठक… ठक…
अचानक उसी समय कमरे के बाहर दस्तक हुई।
दोनों दोस्तों के चेहरे सफेद पड़ गए।
समीर धीरे से बोला—
“तूने सुना?”
निखिल ने हिम्मत दिखाने की कोशिश की।
“कोई होगा।”
लेकिन जब उसने दरवाज़ा खोला… बाहर कोई नहीं था।
सिर्फ खाली अंधेरा।
2
उस रात निखिल ने वहीं रुकने का फैसला किया।
“अगर यहाँ कुछ अजीब हुआ तो वीडियो वायरल हो जाएगी।”
समीर डर गया।
“भाई, गाँव वाले कहते हैं यहाँ रात बिताना ठीक नहीं।”
लेकिन निखिल नहीं माना।
रात के करीब एक बजे बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया।
निखिल कैमरा ऑन करके रिकॉर्डिंग करने लगा।
तभी ऊपर वाली मंज़िल से किसी के चलने की आवाज़ आई।
चर्र… चर्र…
जैसे कोई धीरे-धीरे लकड़ी के फर्श पर चल रहा हो।
समीर काँपती आवाज़ में बोला—
“ऊपर कौन है?”
कोई जवाब नहीं आया।
फिर अचानक—
ठक… ठक… ठक…
इस बार आवाज़ बिल्कुल उनके कमरे के दरवाज़े पर हुई।
निखिल ने कैमरा दरवाज़े की तरफ घुमाया।
धीरे-धीरे उसने दरवाज़ा खोला।
कॉरिडोर खाली था।
लेकिन फर्श पर पानी के निशान बने हुए थे… जैसे कोई भीगे पैरों से अभी-अभी वहाँ खड़ा था।
निशान सीधे सीढ़ियों की तरफ जा रहे थे।
निखिल कैमरा लेकर उनके पीछे चल पड़ा।
ऊपर पहुँचते ही हवा अचानक बहुत ठंडी हो गई।
एक कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ था।
अंदर से किसी लड़की के रोने की आवाज़ आ रही थी।
समीर लगभग रो पड़ा।
“भाई चल यहाँ से…”
लेकिन निखिल ने दरवाज़ा खोल दिया।
कमरा पूरी तरह खाली था।
सिर्फ दीवार पर एक लड़की की पुरानी फोटो टंगी थी।
वही लड़की… राधा।
फोटो के नीचे लाल रंग से लिखा था—
“मुझे इंसाफ चाहिए।”
अचानक पीछे से दरवाज़ा ज़ोर से बंद हो गया।
धड़ाम!
दोनों चीख पड़े।
कमरे की लाइट अपने आप जलने-बुझने लगी।
और तभी…
कैमरे में एक परछाईं दिखाई दी।
लंबे बाल… सफेद चेहरा… और काली आँखें।
वो धीरे-धीरे निखिल के पीछे खड़ी हो गई।
समीर डर के मारे जमीन पर गिर पड़ा।
लेकिन निखिल को कुछ महसूस नहीं हुआ।
जब उसने कैमरे की स्क्रीन में देखा…
उसकी चीख निकल गई।
3
अगली सुबह दोनों किसी तरह घर से बाहर निकले।
समीर ने कहा—
“मैंने कहा था ना… ये जगह ठीक नहीं।”
लेकिन निखिल के दिमाग में सिर्फ एक बात घूम रही थी।
राधा कौन थी?
और उसकी आत्मा क्या चाहती थी?
गाँव के एक बूढ़े आदमी ने उन्हें सच बताया।
“राधा इस घर की बेटी थी। बहुत सीधी लड़की। लेकिन एक रात वो अचानक गायब हो गई। कुछ दिनों बाद उसकी लाश कुएँ में मिली।”
“पुलिस ने कहा उसने आत्महत्या की।”
“लेकिन गाँव वाले जानते थे… उसका खून हुआ था।”
निखिल ने पूछा—
“किसने किया?”
बूढ़ा आदमी चुप हो गया।
उसकी आँखों में डर था।
“जिसने किया… वो आज भी जिंदा है।”
उसी रात निखिल ने डायरी दोबारा खोली।
आख़िरी पन्ने पर कुछ नया लिखा हुआ था।
“अगर तुम सच जानना चाहते हो… तो पुराने कुएँ के पास आओ।”
निखिल के हाथ काँप गए।
“ये पहले यहाँ नहीं लिखा था…”
रात के दो बजे वो अकेला पुराने कुएँ के पास पहुँचा।
चारों तरफ घना अंधेरा था।
अचानक पीछे से आवाज़ आई—
“तुम आ गए…”
निखिल ने पलटकर देखा।
सफेद कपड़ों में एक लड़की खड़ी थी।
राधा।
उसका चेहरा दर्द से भरा था। आँखों से आँसू बह रहे थे।
वो धीरे से बोली—
“मुझे मरना नहीं था…”
निखिल डर से जड़ हो गया।
राधा ने काँपते हाथ से हवेली की तरफ इशारा किया।
“मेरे अपने लोगों ने मुझे मार दिया…”
“क्योंकि मैं उस लड़के से प्यार करती थी जो गरीब था।”
निखिल की आँखें फैल गईं।
“मेरे पिता ने… और मेरे भाई ने…”
उसकी आवाज़ टूट गई।
“उन्होंने मुझे इस कुएँ में फेंक दिया।”
अचानक हवा तेज़ हो गई।
राधा की आँखें अब पूरी काली हो चुकी थीं।
“लेकिन मेरी आत्मा तब तक नहीं जाएगी… जब तक सच सबके सामने नहीं आएगा।”
4
अगले दिन निखिल ने पूरी सच्चाई पुलिस को बताई।
पहले किसी ने विश्वास नहीं किया।
लेकिन फिर पुराने कुएँ की खुदाई हुई।
वहाँ से राधा के गहने और उसके कपड़ों के टुकड़े मिले।
राधा के पिता और भाई गिरफ्तार हो गए।
पूरा गाँव सन्न रह गया।
उस रात निखिल आख़िरी बार हवेली गया।
कमरे में वही फोटो टंगी थी।
लेकिन इस बार फोटो में राधा मुस्कुरा रही थी।
धीरे-धीरे कमरे में ठंडी हवा चली।
और एक मीठी आवाज़ सुनाई दी—
“धन्यवाद…”
फिर अचानक फोटो जमीन पर गिर गई।
काँच टूट गया।
और उसके साथ ही हवेली में फैला अजीब डर हमेशा के लिए खत्म हो गया।
5
कुछ महीनों बाद निखिल ने इस घटना पर वीडियो बनाई।
वीडियो इंटरनेट पर छा गई।
लेकिन उसने डायरी की बात किसी को नहीं बताई।
क्योंकि वो जानता था…
कुछ रहस्य दुनिया से छिपे रहना ही बेहतर होते हैं।
एक रात जब वो वीडियो एडिट कर रहा था, तभी उसकी टेबल पर रखी वही लाल डायरी अपने आप खुल गई।
उसके आख़िरी पन्ने पर धीरे-धीरे नए शब्द उभरने लगे—
“एक कहानी खत्म हुई है…
लेकिन दूसरी अभी बाकी है…”
और उसी पल कमरे की लाइट बंद हो गई।
ठक… ठक… ठक…
दरवाज़े पर फिर वही तीन दस्तक
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