प्राचीन रहस्य — “नागमणि की गुफा”
मध्य प्रदेश के घने जंगलों के बीच एक उजड़ा हुआ गाँव था—“सर्पपुर”।
कभी वह गाँव बहुत समृद्ध माना जाता था, लेकिन अचानक एक रात पूरा गाँव खाली हो गया। लोग कहते थे कि वहाँ एक प्राचीन गुफा है, जिसमें “नागमणि” छुपी हुई है। जो भी उसे पाने गया… वापस नहीं लौटा।
सालों बाद, 19 साल का युवान अपने पिता की पुरानी डायरी पढ़ रहा था। उसके पिता एक खोजकर्ता थे, जो कई साल पहले सर्पपुर गए थे… और फिर कभी लौटकर नहीं आए।
डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था—
“गुफा सच में मौजूद है… लेकिन वहाँ जो पहरा देता है, वह इंसान नहीं।”
युवान की आँखों में डर से ज्यादा जिज्ञासा थी। उसने तय किया कि वह अपने पिता की सच्चाई जानकर रहेगा।
अगली सुबह वह अपने दोस्त करण के साथ सर्पपुर के लिए निकल पड़ा।
जंगल जितना अंदर जाता, उतना ही अजीब होता जा रहा था। पेड़ों पर साँपों की आकृतियाँ बनी थीं, और हवा में एक अजीब सी गंध थी।
शाम तक दोनों उस उजड़े गाँव में पहुँच गए।
टूटे हुए घर… खाली गलियाँ… और हर दीवार पर एक ही चिन्ह—फन फैलाए नाग का।
करण डर गया। “मुझे ये जगह ठीक नहीं लग रही…”
तभी अचानक दूर मंदिर की घंटी बजी।
टन्न्न…
दोनों चौंक गए।
गाँव तो सालों से खाली था… फिर घंटी किसने बजाई?
वे धीरे-धीरे आवाज की तरफ बढ़े।
गाँव के बीचों-बीच एक पुराना पत्थर का मंदिर था। मंदिर के दरवाजे आधे खुले हुए थे।
अंदर अंधेरा था।
युवान ने टॉर्च जलाई।
दीवारों पर प्राचीन चित्र बने थे—राजा, सैनिक और विशाल साँप।
फिर उसकी नजर एक पत्थर पर गई, जहाँ संस्कृत में लिखा था—
“नागमणि केवल उसी को मिलेगी, जिसका मन लालच से मुक्त हो।”
अचानक मंदिर की जमीन काँपने लगी।
धीरे-धीरे बीच का पत्थर खिसका और नीचे जाने वाली सीढ़ियाँ दिखाई देने लगीं।
करण पीछे हट गया। “हमें वापस चलना चाहिए।”
लेकिन युवान नीचे उतरने लगा।
मजबूरी में करण भी उसके पीछे गया।
सीढ़ियाँ बहुत गहरी थीं। नीचे पहुँचते ही उन्हें एक विशाल गुफा दिखाई दी।
गुफा की दीवारें चमक रही थीं, जैसे उनमें हजारों छोटे हीरे जड़े हों।
बीच में पत्थर का एक चबूतरा था… और उस पर रखी थी एक चमकती हुई नीली मणि।
“नागमणि…” युवान फुसफुसाया।
जैसे ही वह आगे बढ़ा, अचानक पूरी गुफा में फुफकार की आवाज गूँज उठी।
स्स्स्स्स्स…
दोनों के पैरों तले जमीन काँपने लगी।
अंधेरे में दो विशाल लाल आँखें चमकीं।
फिर धीरे-धीरे एक विशाल काला नाग सामने आया।
उसका आकार इतना बड़ा था कि उसका सिर इंसान जितना ऊँचा था।
करण डर के मारे चीख पड़ा।
नाग की आवाज गुफा में गूँजी—
“सदियों से मैं इस मणि की रक्षा कर रहा हूँ…”
युवान काँप गया, लेकिन उसने हिम्मत करके पूछा, “मेरे पिता कहाँ हैं?”
नाग कुछ पल चुप रहा।
फिर उसने अपनी पूँछ से गुफा के कोने की तरफ इशारा किया।
वहाँ कई पुराने बैग और टूटे कैमरे पड़े थे।
उनमें युवान के पिता की डायरी भी थी।
युवान की आँखें भर आईं।
“क्या… वो मर चुके हैं?”
नाग बोला, “उन्होंने मणि चुराने की कोशिश की थी। लालच इंसान को अंधा बना देता है।”
युवान समझ गया कि उसके पिता खजाने के लालच में अपनी जान गंवा बैठे थे।
अचानक नागमणि की चमक तेज होने लगी।
गुफा की दीवारों पर अजीब दृश्य दिखाई देने लगे—सोना, महल, अनगिनत दौलत।
करण धीरे-धीरे मणि की तरफ बढ़ने लगा।
उसकी आँखें बदल चुकी थीं।
“हम अमीर बन सकते हैं…” वह बोला।
युवान चिल्लाया, “रुको! ये जाल है!”
लेकिन करण ने उसकी बात नहीं सुनी।
जैसे ही उसने नागमणि को छुआ…
पूरी गुफा हिल उठी।
एक तेज चीख गूँजी।
और अगले ही पल करण पत्थर की मूर्ति बन चुका था।
युवान डर से पीछे हट गया।
नाग बोला, “जो लालच में अंधा हो जाए… उसका यही अंत होता है।”
युवान ने काँपते हुए कहा, “मुझे मणि नहीं चाहिए… मैं सिर्फ यहाँ से जाना चाहता हूँ।”
कुछ सेकंड तक गुफा में सन्नाटा छाया रहा।
फिर नाग धीरे-धीरे पीछे हट गया।
“तुमने लालच पर विजय पाई है,” उसने कहा। “इसीलिए तुम्हें जीवनदान मिलता है।”
अचानक गुफा का रास्ता खुलने लगा।
युवान भागता हुआ बाहर निकल गया।
जैसे ही वह जंगल से बाहर पहुँचा, पीछे मुड़कर देखा—
पूरा मंदिर जमीन में समा रहा था।
कुछ ही मिनटों में वहाँ कुछ भी नहीं बचा।
सिर्फ हवा में गूँजती एक फुफकार…
और करण की आखिरी चीख।
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